मिलावटी खाद्य पदार्थ ये मानव स्वास्थ्य को पहुंचाते हैं हानि
Modern Kheti - Hindi|September 15, 2020
मिलावटी खाद्य पदार्थ ये मानव स्वास्थ्य को पहुंचाते हैं हानि
अधिकतर अनाज, दालों, मसालों, चाय, कॉफी, चीनी आदि में इनकी मात्रा बढ़ाने हेतु रेत, मिट्टी, कंकड़, पत्थर, तिनके आदि मिलाए जाते हैं। सस्ती व सर्वसुलभता के कारण खेसारी की दाल अरहर व चना की दाल, पिसे हुए बेसन तथा उसके व्यंजनों में मिलाई जाती है।
नाजमीन बानो,बाबा साहेब,भीमराव अंबेडकर

''आहार शुद्धो सत्व शुद्धि" (जब भोजन शुद्ध होता है तब प्राण की प्रकृति भी शुद्ध होती है) मिलावट से बचने के लिए भारत के नीति निर्माताओं ने कठोर दंड का प्रावधान रखा था। इतिहास भी इस बात का साक्षी है कि जब जब मिलावट जैसा दुष्कर्म हुआ है उसके लिए कौटिल्य मनु जैसे विद्वानों ने भी दंड का प्रावधान रखा। कौटिल्य ने मिलावट करने वाले के 12 से 54 पद अर्थदंड का प्रावधान रखा मनु ने सड़ा गला मांस बेचने वालों के लिए 100 पडो का अर्थ दंड तथा दोनों टांग और एक हाथ करने जैसा भयानक दंड का प्रावधान रखा।

निश्चित ही खाद्य पदार्थों में मिलावट करना किसी राष्ट्र में बम फेंकने जैसा ही होता है क्योंकि भोज्य पदार्थों में खतरनाक मिलावट होने से होने वाली क्षति रासायनिक शास्त्रों से होने वाली क्षति से कम नहीं होती।

खाद्य पदार्थ खेत से उपभोक्ता तक पहुंचते पहुंचते विभिन्न परिस्थितियों से गुजरते हैं जिसमें फसल उगाने, काटने, संग्रह करने यातायात व वितरण जैसी सभी प्रक्रियाओं में मिलावट की संभावनाएं रहती हैं। यह मिलावट अधिक पैसे कमारे, जानबूझ कर या अज्ञानतावश, असावधानी तथा अस्वच्छता के कारण हो सकती है। किसी भी मिलावट से खाद्य पदार्थों के पोषक तत्वों, गुणों, धर्म व प्रकृति में परिवर्तन हो जाता है। अधिकतर अनाज, दालों, मसालों, चाय, कॉफी, चीनी आदि में इनकी मात्रा बढ़ाने हेतु रेत, मिट्टी, कंकड़, पत्थर, तिनके आदि मिलाए जाते हैं। सस्ती व सर्वसुलभता के कारण खेसारी की दाल अरहर व चना की दाल, पिसे हुए बेसन तथा उसके व्यंजनों में मिलाई जाती है। खेसारी दाल में बीटा ओक्सिल एमिनो अलानिन नामक विषाक्त पदार्थ के कारण मनुष्य में लैथेरिज्म रोग फैलता है जिससे रीढ़ की हड्डियों पर प्रभाव पड़ता है। लंबे समय तक इसके उपयोग से घुटनों, एड़ी व पिंडलियों में दर्द होता है तथा कुछ दिनों में टांगों में टेढ़ापन आने से व्यक्ति अपाहिज हो जाता है।

सर्वाधिक मिलावट तो दूध में की जाती है। जो व्यक्ति के दैनिक जीवन में बहुत उपयोगी है अरारोट या तीखुर मिलाना, गाय भैंस या बकरी के परस्पर विरोधी गुण दोष वाले जानवरों के दूध को मिलाना तो वर्षा से चलता आया है अब दूध को काफी समय तक रखने के लिए उसमें खाने का सोडा, नमक या फर्मलिन लोशन तक की मिलावट की जाती है। यह लोशन बच्चों तथा कमजोर व्यक्तियों के लिए प्राण घातक होता है। मिलावट की बात तो अलग ही रह गई, अब तो सफेदा पेंट, यूरिया व निरमा के मिश्रण से रासायनिक दूध तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा दूध में मैलानिन जैसे रासायनिक पदार्थों को मिलाया जा रहा है जिससे पैकेट के दूध को गर्म करने पर मोटी मलाई दिखाई पड़ती है। यह मलाई नहीं एक तरह का जहर है जो मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक है। नाइट्रोजन ऑक्साइड अधिक होने के कारण इसे प्रोटीन का अच्छा स्रोत मान लिया गया इससे बना दूध पीने से 2008 में चीन में लाखों लोगों की मृत्यु हो गई जो इतिहास में चाइनीज मिल्क स्कैंडल नाम से जाना जाता है। इतना ही नहीं आजकल बाजार में खाद्य पदार्थों के अलावा दवाइयां व इंजेक्शन के साथ कृत्रिम रक्त भी उपलब्ध है।

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September 15, 2020