प्याज व लहसुन में परिपक्वता का करें सही चुनाव
Modern Kheti - Hindi|September 15, 2020
प्याज व लहसुन में परिपक्वता का करें सही चुनाव
किसान भाई कभी भी लहसुन व प्याज की खुदाई अपरिपक्व अवस्था में न करें अन्यथा कंदों की गुणवत्ता व भंडारण क्षमता कम हो जाती है, जिससे किसानों की आय पर विपरीत प्रभाव आ सकता है। पत्तियों पर पीलापन व सुखना शुरू होने पर सिंचाई बंद कर दें। इसके कुछ दिन बाद लहसुन की खुदाई शुरू करें।
डॉ. कुलदीप कुमार, डॉ. किशोर चंद कुम्हार, डॉ. वी.के. बत्रा एवं मुकेश कुमार

प्याज व लहसुन हमारे देश एवं प्रदेश की महत्वपूर्ण शल्क कंदी (बल्ब) फसल है। इनमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फास्फोर्स, कैल्शियम, मैग्नीशियम के साथ-साथ विटामिन्स भी पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अलावा लहसुन में कीटनाशक, कवकनाशक आदि गुण भी पाए जाते हैं । यह जोड़ों में दर्द, भूख न लगना तथा कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। हरियाणा में किसान लहसुन की बिजाई सितम्बर से लेकर अक्टूबर तथा प्याज की नर्सरी अक्टूबर से नवंबर तक लगा सकते हैं। प्याज की पौध लगभग 6 से 8 सप्ताह बाद जब 20 सें.मी. से 35 सें.मी. की लंबाई होने उपरांत, खेत में रोपाई कर देते हैं।

प्याज के तीखापन का कारण : एलाइल प्रोपाइल डाईसल्फाइड नामक पदार्थ के कारण।

प्याज में पीले रंग का कारण : क्वेरसीटीन नामक पदार्थ के कारण।

लहसुन के तीखापन का कारण : डाईएलाइल डाईसल्फाइड नामक पदार्थ के कारण।

लहसुन की खुदाई अप्रैल माह में बिजाई के लगभग 130 से 150 दिन बाद करते हैं, फसल की खुदाई मौसम, किस्म व खेत की मिट्टी के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है। अप्रैल माह में जब पौधे की पत्तियां पीली पड़ने लगे तथा कंद के पास गर्दन से नरम होकर झुकने लगे एवं कंदों के रंग में चमक आ जाए, तब इसे खुदाई योग्य समझना चाहिए। किसान भाई कभी भी लहसुन व प्याज की खुदाई अपरिपक्व अवस्था में न करें अन्यथा कंदों की गुणवत्ता व भंडारण क्षमता कम हो जाती है, जिससे किसानों की आय पर विपरीत प्रभाव आ सकता है। पत्तियों पर पीलापन व सुखना शुरू होने पर सिंचाई बंद कर दें। इसके कुछ दिन बाद लहसुन की खुदाई शुरू करें। खुदाई के बाद गांठों को 3-4 दिन तक छाया में सुखाने के बाद पत्तियों को गर्दन से 2-3 सैं.मी. छोड़कर काट दें या 25-50 गांठों की पत्तियों को बांधकर गुच्छियां बना लेते हैं। लहसुन का भंडारण गुच्छियों के रूप में कंदों को टाट की बोरियों में या लकड़ी की पेटियों में रखकर कर सकते हैं। भंडारण शुष्क हवादार एवं अंधेरे कमरे में अच्छा साबित हुआ है। शीतगृह में इसका भंडारण 0 से 2 डिग्री सें.ग्रे. तापक्रम व 65 से 75% आर्द्रता पर 3-4 महीने तक कर सकते हैं।

हमारे देश में प्याज की खेती अधिकतर रबी के मौसम में की जाती है, क्योंकि रबी में प्याज की खेती करने पर कीट एवं रोग भी कम लगते हैं, साथ ही अप्रैल और मई में तापमान अधिक होने के कारण प्याज पूरी तरह से सूख जाता है जिससे लंबे समय तक भंडारण किया जा सकता है, मतलब किसान इसका भंडारण कर बाद में अच्छी कीमत पर बेच सकता है, जिससे अच्छा लाभ मिलता है। हर मौसम के फसल के अपने फायदे हैं। अगर रबी के मौसम में प्याज की उपज अधिक मात्रा में होती है और उसका भंडारण अधिक समय तक किया जा सकता है, तो इस समय प्याज की अधिकता होने के कारण उचित मूल्य नहीं मिल पाता। इसके लिए किसान को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।

articleRead

You can read up to 3 premium stories before you subscribe to Magzter GOLD

Log in, if you are already a subscriber

GoldLogo

Get unlimited access to thousands of curated premium stories, newspapers and 5,000+ magazines

READ THE ENTIRE ISSUE

September 15, 2020