उचित फसल चक्र अपनाएं, मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ाएं
Modern Kheti - Hindi|September 15, 2020
उचित फसल चक्र अपनाएं, मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ाएं
फलीदार फसलों को फसल चक्र में सम्मिलित करने से भूमि की उर्वरा शक्ति नष्ट नहीं होती क्योंकि दलहनी फसलों का प्रयोग करने से नाइट्रोजन का जैविक स्थिरीकण होता है जिससे मृदा नाइट्रोजन के मामले में आत्मनिर्भर बनती है।
मीना सुहाग, श्वेता और नीलम

हरित क्रांति की सूत्रधार फसलों जैसे गेहूं-धान के अधिकतम उत्पादन के लिए अपनाई गई रासायनिक पद्धति के दुष्परिणाम हाल ही के कुछ वर्षों में दृष्टिगत होने लगे हैं। इन फसलों के अधिकतम उत्पादन के कारण भूमि का अंधाधुंध दोहन हुआ जिस कारण भूमिगत जल स्तर में काफी गिरावट आई तथा मृदा की उर्वरा शक्ति में भी काफी कमी आई। लगातार एक ही फसल चक्र अपनाने के कारण भूमि और पौधों में कुछ विशेष तत्वों जैसे गंधक, लोहा, तांबा, जस्ता, मैंग्नीज आदि की कमी होने लगी तथा फसल उत्पादकता में गिरावट होने लगी है।

articleRead

You can read up to 3 premium stories before you subscribe to Magzter GOLD

Log in, if you are already a subscriber

GoldLogo

Get unlimited access to thousands of curated premium stories, newspapers and 5,000+ magazines

READ THE ENTIRE ISSUE

September 15, 2020