खरीफ फसलों की देखभाल
Modern Kheti - Hindi|August 1, 2020
खरीफ फसलों की देखभाल
खरीफ फसलों में अगस्त का महीना फसल की अंतिम उत्पादकता का दर्पण होता है। यह महीना फसलों की निराई-गुड़ाई, खड़ी फसल में यूरिया खाद देना, पोषक तत्वों की कमी की पहचान तथा उसकी रोकथाम आदि के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

यदि पौधों के पत्ते चिकने-चमकदार, पोषक तत्वों की कमी तथा बीमारी आदि से मुक्त है, तो जुलाई में फसलों की बुवाई, रोपाई की कड़ी मेहनत काफी हद तक सफल हो जाती है। अत: हम कुछ बातों को ध्यान में रखकर अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

निराई-गुड़ाई : वर्षा ऋतु में खरपतवारों को समस्या सबसे ज्यादा होती है। खरपतवार फसलों से पोषक तत्वों, जल, प्रकाश तथा स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे फसल का उचित विकास नहीं होता है। ऐसे में खरपतवारों की निराई करके हल्की गुड़ाई कर देनी चाहिए, जिससे फसलों की अच्छी बढ़वार हो सके।

जल निकास का प्रबंध : दलहनी, तिलहनी,मक्का तथा बाजरा आदि फसलों में जल भराव नुकसान पहुंचाता है। अधिक वर्षा की दशा में ढाल की तरफ मेंड़ को काटकर पानी निकाल दें तथा पानी को कई जगह से एक साथ निकालें जिससे मृदा कटाव कम होगा। इसके विपरीत असिंचित शुष्क कृषि वाले क्षेत्रों में कम वर्षा की वजह से मेड़ को मजबूत रखें, जिससे खेत का पानी बाहर न निकलने पाए, परन्तु वहां पर भी जल भराव की स्थिति न आने दें।

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August 1, 2020