क्या भारत फिर कृषि प्रधान बनेगा?
Modern Kheti - Hindi|August 1, 2020
क्या भारत फिर कृषि प्रधान बनेगा?
समाज में किस्सागोई का अपना महत्व है। ये किस्से अक्सर दीर्घकालीन बदलावों का सशक्त संकेत देते हैं। कुछ दशकों पहले जब किसान अपने खेतों से कीटों के गायब होने और परागण न होने की चर्चा करते थे, तब कहानियों से ही पता चला था कि इन कीटों की विलुप्ति से खेती पर नकारात्मक असर पड़ा रहा है।

1918-19 में स्पेनिश फ्लू के तुरंत बाद बहुत से स्वास्थ्यकर्मियों ने पशुओं से उत्पन्न होने वाली बीमारियों के बारे में बात की थी। ये कहानियां घरों के ड्राइंग रूम में खूब सुनाई गई। किसको पता था कि दशकों बाद वैज्ञानिक महामारी की भविष्यवाणी करेंगे और कोविड-19 उनमें से एक होगी।

वर्तमान में हम किसानों से कुछ कहानियां सुन रहे हैं। भारतीय गांव अप्रत्याशित रूप से जीवंत हो उठे हैं क्योंकि लाखों प्रवासी मजदूर लॉकडाउन के कारण आर्थिक गतिविधियों के थमने से लौट आए हैं। ये लोग गांव में किन मुद्दों पर बात कर रहे हैं? अधिकांश लोग जीवनयापन के भविष्य पर बात कर रहे हैं। चर्चा का एक बड़ा मुद्दा यह है कि वे दिहाड़ी मजदूरी के लिए शहरों में लौटे या नहीं। अगर वे नहीं लौटते तब क्या करेंगे?

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August 1, 2020