मूंग की उन्नत किस्में व कृषि क्रियाएं
Modern Kheti - Hindi|July 15, 2020
मूंग की उन्नत किस्में व कृषि क्रियाएं
एक एकड़ के बीज को छाया में पक्के फर्श पर फैलाकर बह धोल अच्छी तरह बीज में मिला दें ताकि प्रत्येक वीज पर गुड़ का घोल चिपक जाए। इसके बाद राइजोबियम के पैकेट को खोलकर गुड़ लगे वीज पर डालें तथा हाथों से सारे बीज में मिला दें। कल्चर लगे बीज को छाया में सुखाकर बिजाई करें।
डॉ. विनोद कुमार, कृषि विज्ञान केन्द्र, मंडकोला चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार

दालों का हमारे भोजन में विशेष महत्व है। भारत में ज्यादातर जनसंख्या शाकाहारी है। चूंकि विभिन्न दलहनी फसलों में 20-40 प्रतिशत तक प्रोटीन की मात्रा होती हैं। इसलिए दालें शाकाहारी भोजन आहरियों के लिए प्रोटीन का महत्वपूर्ण स्रोत है। परन्तु हमारे देश में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 80 ग्राम दालों की जरूरत के विरूद्ध केवल 42 ग्राम दालें प्रति व्यक्ति प्रतिदिन उपलब्ध हो पाती हैं। इसका प्रमुख कारण दालों का कम उत्पादन होना तथा विशाल जनसंख्या है। यद्यपि हमारा दालों का कुल उत्पादन 1950-51 में 8.4 मिलियन टन से बढ़कर 2008-09 में 14.57 मिलियन टन हो गया है तथा आज भारत का दलहन उत्पादन में विश्व में प्रथम स्थान है। इसके बावजूद हमें हर वर्ष 2-3 मिलियन टन अर्थात हमारे कुल उत्पादन का 1/5 भाग दूसरे देशों से आयात करना पड़ता है। इन हालातों के मध्यनजर दलहन उत्पादन बढ़ाना सरकार की भी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। दालों का उत्पादन बढ़ाने के लिए एक अच्छा विकल्प है।

उन्नत किस्में:

बसंती: इस किस्म को राज्य के सभी क्षेत्रों में खरीफ व बसंत (मार्च में सिचाई) मौसम में सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। पुरानी किस्मों की तुलना में इसकी पैदावार (6-7 क्विंटल प्रति एकड़) अधिक है। यह लंबी बढ़ने वाली किस्म है। इसका दाना अत्याधिक स्वादिष्ट, आकर्षक तथा अधिक प्रोटीन वाला होता है। इसकी 90 प्रतिशत फलियां एकसाथ पक जाती हैं। यह लगभग 65 दिनों में पक कर तैयार हो जाती हैं।

एम.एच.421 : इस किस्म को भी राज्य के सभी क्षेत्रों में खरीफ, बसंत व ग्रीष्मकालीन मौसम में सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है क्योंकि यह किस्म बहुत कम समय यानि 60 दिनों में ही पक कर तैयार हो जाती है। इसकी फलियां झड़ती नहीं हैं। यह पीले पत्ते वाले मोजैक वायरस रोग, पत्तों के धब्बों का रोग व जलयुक्त झुलसा रोग (वेब ब्लाईट) के लिए अवरोधी है। इसका दाना आकर्षक, चमकीला व हरा तथा मध्यम आकार का होता हैं जिसकी औसत पैदावार 4.0-4.8 क्विंटल प्रति एकड़ ग्रीष्मकाल में व 5.6-6.4 क्विंटल प्रति एकड़ खरीफ में आंकी गई है।

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July 15, 2020