युवाओ ने की पहल तो खेती में मिली सफलता
Farm and Food|September Second 2020
युवाओ ने की पहल तो खेती में मिली सफलता
देश में युवाओं के सामने रोजगार एक बड़ी समस्या है. उन का रोजगार की तलाश में घर से दूर पलायन करने का कारण स्थानीय लैवल पर रोजगार न मिलना भी है. ऐसे में युवाओं के पलायन की रोकथाम के लिए ऐसी पहल की जरूरत है, जिस से उन्हें स्थानीय लैवल पर ही रोजगार मुहैया हो पाए. इस के लिए जरूरत है स्थानीय लैवल पर रोजगार के अवसरों की तलाश. ऐसे ही बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में काम करने वाली सामाजिक संस्था आगा खान ग्राम समर्थन कार्यक्रम भारत ने जौन डियर इंडिया के सहयोग से कई गांवों में स्थानीय लैवल पर खेती में रोजगार के अवसरों की तलाश की और गांव से पलायन कर चुके युवाओं को फिर से गांव में वापस लाने में मदद भी की है. इस से इन युवाओं की दिशा ही बदल गई है. आज बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के गांवों के ये युवा खेती के जरीए लाखों रुपए की आमदनी प्राप्त कर रहे हैं.
बृहस्पति कुमार पांडेय

मुजफ्फरपुर जिले के बंदरा प्रखंड के कई ऐसे गांव हैं, जहां किसान परिवारों के युवक कुछ साल पहले रोजगार के चलते दूसरे शहरों को पलायन कर चुके थे. ऐसे में इन परिवारों में औरतें और बुजुर्ग ही गांवों में रह कर खेती का काम करते थे.

स्थानीय लेवल पर खेती के मसले पर काम कर रही संस्था आगा खान ग्राम समर्थन कार्यक्रम भारत ने जब इन गांवों में खेती से जुड़ी जानकारियां इकट्ठा की, तो पता चला कि किसान परिवारों के युवक पारंपरिक तरीके से खेती में लाभ न होने के चलते शहरों में पलायन कर चुके हैं. ऐसे में इस संस्था ने इन किसान परिवारों के बड़े बुजुर्गों से गांव के युवकों को वापस बुला कर उन्नत तरीके से खेती करने की सलाह दी.

पहले तो गांव वालों ने यह कह कर मना कर दिया कि खेती से लाभ हो ही नहीं सकता है, इसलिए वे सिर्फ अपने खाने भर का ही अनाज उपजाएंगे, लेकिन जब संस्था के लोगों ने किसान परिवारों को यह विश्वास दिलाया कि अगर उन के बताए तरीके से खेती की जाए तो लाखों रुपए की आमदनी की जा सकती है.

संस्था की यह बात किसानों को कुछ हद तक ठीक लगी और वे संस्था के बताए तरीके से खेती करने को तैयार हो गए.

मेघ रतवारा, प्यारे टोला, सुंदरपुर रतवारा सहित दर्जनों गांवों के इन किसान परिवारों ने अपने घर के युवकों को घर वापस बुला लिया और आगा खान ग्राम समर्थन कार्यक्रम भारत व जौन डियर इंडिया की देखरेख में सब्जियों की खेती शुरू की.

संस्था द्वारा इन किसानों को खेती में काम आने वाले बीज, हरित व पौलीहाउस, बांसबल्ली आदि चीजों के साथसाथ ट्रेनिंग भी मुफ्त में मुहैया कराई गई.

गांव के इन युवाओं ने सब से पहले गोभी, टमाटर, मटर जैसी फसलों की व्यावसायिक लैवल पर खेती शुरू की. चूंकि ये युवक संस्था के बताए अनुसार उन्नत बीज और आधुनिक तकनीक का उपयोग कर रहे थे, ऐसे में उन्हें पहली बार ही बंपर उत्पादन प्राप्त हुआ, जिस से इन युवाओं को लागत की तुलना में 3 से 4 गुना ज्यादा लाभ मिला. इस के बाद इन युवाओं का हौसला बढ़ गया और वे दोगुने उत्साह के साथ खेती में जुट गए.

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