धान में भूरी खाद की उपयोगिता
Farm and Food|August First 2020
धान में भूरी खाद की उपयोगिता
फसलों की उपज बढ़ाने में रासायनिक उर्वरकों का योगदान किसी से छिपा नहीं है. रासायनिक उर्वरकों के ही इस्तेमाल से भारत में हरित क्रांति आई, लेकिन असंतुलित रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से मिट्टी की सेहत का स्तर काफी गिर गया है और रासायनिक उर्वरकों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. कंपोस्ट व गोबर की खाद भरपूर मात्रा में उपलब्ध नहीं हो पा रही है.
डा. शेर सिंह एवं डा. जेपी सिंह

रासायनिक उर्वरकों के इतर प्राकृतिक खाद से धान की पैदावार बढ़ाने की कवायद के बीच वैज्ञानिक भूरी खाद (ब्राउन मैन्योरिंग) का इस्तेमाल करने पर जोर दे रहे हैं. भूरी खाद एक ऐसी तकनीक है, जिस में धान की रोपाई/बोआई के बाद लैंचा का बीज छींट दिया जाता है. उस के बाद खरपतवारनाशक का छिड़काव कर देते हैं, जिस से वह वहीं गल जाता है.

खरपतवारनाशक छिड़कने के 4-5 दिन बाद उस का रंग ब्राउन हो जाता है, इसलिए इसे ब्राउन मैन्योरिंग कहते हैं.

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