रोग प्रतिरोधकता शरीर के लिए है जरुरी
Farm and Food|July Second 2020
रोग प्रतिरोधकता शरीर के लिए है जरुरी
बहुत ही साधारण शब्दों में कहें, तो शरीर में रोग पैदा करने वाले हानिकारक कीटाणुओं को कोशिकाओं के अंदर प्रवेश न करने देने की क्षमता को ही रोग प्रतिरोधकता कहते हैं.
डा. संजीव कुमार वर्मा

रोग प्रतिरोधकता के प्रकार

यह आमतौर पर 2 तरह की होती है:

• जन्मजात रोग प्रतिरोधकता और

• उपार्जित रोग प्रतिरोधकता

जन्मजात रोग प्रतिरोधकता किसी भी जीव में जन्म के समय से ही विद्यमान होती है, जबकि उपार्जित रोग प्रतिरोधकता जन्म के बाद हासिल की जाती है. जन्मजात रोग प्रतिरोधकता के काम न करने की हालत में उपार्जित रोग प्रतिरोधकता अपना काम करने लगती है.

उपार्जित रोग प्रतिरोधकता भी 2 तरह की होती है:

• प्राकृतिक

• कृत्रिम

प्राकृतिक उपार्जित रोग प्रतिरोधकता भी 2 तरह की होती है:

• पैसिव

• ऐक्टिव

पैसिव प्राकृतिक उपार्जित रोग प्रतिरोधकता गर्भावस्था के दौरान मां से भ्रूण में प्लेसैंटा के द्वारा स्थानांतरित की जाती है. इस में आमतौर पर IgG का ट्रांसफर होता है और जन्म के तुरंत बाद के दूध में |gA एंटीबौडीज का ट्रांसफर होता है, जबकि ऐक्टिव प्राकृतिक उपार्जित रोग प्रतिरोधकता में रोग पैदा करने वाले किसी रोगकारक के संपर्क में आने के बाद शरीर में उस की इम्यूनोलोजिकल मैमोरी रह जाती है.

अब बात करते हैं कृत्रिम उपार्जित रोग प्रतिरोधकता की. यह भी 2 तरह की होती है:

• पैसिव

• ऐक्टिव

पैसिव कृत्रिम उपार्जित रोग प्रतिरोधकता एंटीबौडी ट्रांसफर से हासिल की जाती है, जबकि ऐक्टिव कृत्रिम उपार्जित रोग प्रतिरोधकता हासिल करने के लिए वैक्सीन का सहारा लिया जाता है.

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