खेत को उपजाऊ बनाती हरी खाद
Farm and Food|July First 2020
खेत को उपजाऊ बनाती हरी खाद
फसल उत्पादन और उत्पाद को बबालिटी बढ़ाने के लिए मिट्टी पर कैमिकल खादों का लगातार अंधाधुंध इस्तेमाल हो रहा है. जीवांश बाली खादों, जैसे फार्म यार्ड मैन्योर यानी गोबर की खाद, कंपोस्ट च हरी खादों का इस्तेमाल न के बराबर हो रहा है. इस का नतीजा यह है कि खेतों की पैदावारी कूबत लगातार घट रही है.

कैमिकल खादों के इस्तेमाल से पोषक तत्वों की कमी तो पूरी हो जाती है, लेकिन मिट्टी के भौतिक व जैविक गुणों का खात्मा हो जाता है. इस के चलते खेत बंजर बनते जा रहे हैं.

हमारे देश में ज्यादातर गोबर को उपले या कंडे यानी ईंधन के रूप में इस्तेमाल कर के खत्म किया जाता है. गोबर की बाकी बची मात्रा, जो खाद के रूप में इस्तेमाल की जाती है, उस के ज्यादातर पोषक तत्व लीचिंग की क्रिया से खत्म हो जाते हैं.

कार्बनिक पदार्थ को मिट्टी में बढ़ाने के लिए ज्यादातर किसान कंपोस्ट खाद को तैयार करने की विधियों से अनजान हैं. मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ बढ़ाने के लिए खलियों का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन हमारे देश में फसलों के लिए पोषक तत्वों की आपूर्ति खलियों से करना नामुमकिन है, क्योंकि इन का इस्तेमाल पशुओं के भोजन के लिए भी किया जाता है.

सभी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ और पोषक तत्वों को सही मात्रा में पहुंचाने और मिट्टी के भौतिक व जैविक गुणों को सुधारने के लिए कैमिकल खादों के साथसाथ जीवांश खादों ब जैविक खादों, जैसे राइजोबियम, अजोला, नील हरित शैवाल, एजेटोबैक्टर, माइकोराइजा बगैरह का इस्तेमाल करना चाहिए.

articleRead

You can read up to 3 premium stories before you subscribe to Magzter GOLD

Log in, if you are already a subscriber

GoldLogo

Get unlimited access to thousands of curated premium stories, newspapers and 5,000+ magazines

READ THE ENTIRE ISSUE

July First 2020