तो क्या टिड्डी दल सारी हरियाली चट कर जाएगा?

Farm and Food|June First 2020

तो क्या टिड्डी दल सारी हरियाली चट कर जाएगा?
बहरों को सुनाने के लिए ऊंची आवाज की जरूरत पड़ती है, यह बात शहीद भगत सिंह ने कही थी. चूंकि पर्यावरण संकट की शुरुआती चेतावनियां नजरअंदाज कर दी गईं, इसलिए शायद कुदरत ने भी अपनी आवाज ऊंची कर ली है. कोरोना महामारी, अंफान तूफान के बाद अब टिड्डी दलों का हमला भी लोगों की मुसीबत बढ़ाने के लिए तैयार बैठा है.
मदन कोथुनियां

अंफान तूफान ने ओडिशा और पश्चिम बंगाल में लाखों लोगों की जिंदगी पर बुरा असर डाला है. लाखों पेड़ टूट कर गिर पड़े हैं और बहुत सारे लोगों की जान चली गई हैं. लाखों लोगों से पहले ही उन के घर खाली करा लिए गए थे. तूफान से हुए पूरे नुकसान का आकलन करने में अभी कुछ समय लगेगा, लेकिन इस बीच भारत में एक और मुसीबत तैयार खड़ी हो रही है.

भारत के कई हिस्सों में टिड्डी दलों की मौजूदगी देखी जा रही है. मीडिया रिपोर्ट बताती हैं कि पाकिस्तान की तरफ से टिड्डियों के कई दल उड़ कर राजस्थान के पार आ गए हैं. चूंकि इस समय राजस्थान के बड़े हिस्से में खेत खाली पड़े हैं, इसलिए उन्हें बैठने और खाने के लिए खास कुछ नहीं मिला, इसलिए वे उड़ कर आगे निकल गए.

राजस्थान के टोंक, बूंदी, सीकर, प्रतापगढ़,नागौर, बीकानेर, बाड़मेर, जोधपुर और चित्तौड़गढ़ जिलों में टिड्डी दलों के दिखने की सूचना मिली है.

तकरीबन 26 साल बाद पिछले साल राजस्थान में लोगों ने टिड्डी दलों का हमला देखा था. पिछले साल मई में शुरू हुआ यह हमला इस साल फरवरी तक चला था.

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