आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रहा है किसान विजय

Farm and Food|June First 2020

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आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रहा है किसान विजय
आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रहा है किसान विजय
मोईनुद्दीन चिश्ती

हमारे देश के किसान खेत में जितनी मेहनत करते हैं, उतनी ही मेहनत अपने उत्पादन को बेचने के लिए नहीं करते. मेरे कहने का मतलब है कि वे सही से मार्केट नहीं तलाशते और जल्द निराश हो कर बैठ जाते हैं. 'किसान भाइयों को अपने उत्पादन को सीधे ही उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का काम करना चाहिए. ऐसा करने पर निश्चित रूप से खेती में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है.'

यह कहना है 21 साला किसान विजय गाडरी का, जो गांव बिलोदा, तहसील डुंगला, चित्तौड़गढ़, राजस्थान के रहने वाले हैं. उन का गांव उदयपुर से 70 किलोमीटर की दूरी पर है. पैसिफिक कालेज औफ एग्रीकल्चर, उदयपुर से कृषि में बीएससी (द्वितीय वर्ष ) की पढ़ाई करने वाले इस युवा किसान ने आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है.

लौकडाउन के चलते जहां एक ओर किसानों को उपज के समुचित दाम नहीं मिल रहे, वहीं विजय ने सस्ते दामों पर अपने खेत में उपजी जैविक सब्जियों को बेचने से मना करते हुए अपने स्तर पर इस का बाजार तलाशा.

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June First 2020