अपनी दुधारू गाय खुद तैयार कीजिए

Farm and Food|May Second 2020

अपनी दुधारू गाय खुद तैयार कीजिए
किसी भी डेरी की कामयाबी के लिए जरूरी है कि उस में अच्छी दुधारू गाएं हों. दुधारू गाएं बाजार से खरीद कर लाने से बेहतर है कि अपनी खुद की दुधारू गाय तैयार की जाए.
डा. संजीव कुमार वर्मा, प्रधान वैज्ञानिक ( पशु पोषण) भा. कृ. अनु. प. - केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान, मेरठ

आप के फार्म पर जो बछिया मौजूद है, अगर आप उस की सही देखभाल करेंगे, उसे सही मात्रा में पोषण उपलब्ध कराएंगे, तो बड़ी हो कर वही बेहतरीन दुधारू गाय बनेगी.

पैदा होने वाली बछिया अच्छी दुधारू गाय बनेगी या नहीं, इस की नींव उस के पैदा होने से भी पहले पड़ जाती है. इस के लिए सब से खास है गर्भाधान. उस बछिया को पैदा करवाने के लिए गाय का गर्भाधान, जिस वीर्य से कराया गया है, उसी के मुताबिक आनुवंशिक गुणों वाली बछिया पैदा होगी. अगर अच्छी नस्ल के सांड़ के वीर्य से गर्भाधान करवाया गया है, तो पैदा होने वाली बछिया भी निश्चित रूप से उत्तम गुणवत्ता की होगी.

दूसरा अहम बिंदु है कि गर्भकाल के दौरान गाय को अगर समुचित पोषण उपलब्ध करवाया गया है, तो पैदा होने वाली बछिया का देह भार आशा के अनुरूप होगा और बाद में वह अच्छी दुधारू गाय के रूप में विकसित होगी. कम देह भार वाली बछिया भविष्य में अच्छी दुधारू गाय नहीं बन सकेगी.

तीसरा अहम बिंदु है कि पैदा होने के बाद नवजात बछिया का पोषण अगर सही से हुआ है, तो वह निश्चित रूप से अच्छी दुधारू गाय बनेगी.

चौथा अहम बिंदु है कि बढ़वार के दौरान उस बछिया को संतुलित पोषण उपलब्ध कराया जाना. अगर बछिया को सभी पोषक तत्त्व उस की आवश्यकता के अनुरूप दिए जाएंगे, तो उस की दैनिक बढ़वार संतोषजनक होगी और वह नियत समय तक उतना देह भार ग्रहण कर लेगी, जितना उस के गर्भाधान के लिए जरूरी है. इस के बाद समय पर ऋतुमयी हो कर गर्भधारण करेगी और एक बेहतरीन दुधारू गाय बनेगी.

3 महीने की उम्र तक का समय अहम

बछिया के जन्म से ले कर 3 महीने की उम्र तक का समय सब से अहम होता है. बच्चा मां के पेट से बाहर निकल कर नए वातावरण में आता है, तो उसे तरहतरह के तनावों का सामना करना पड़ता है. ऐसी हालत में पोषण और प्रबंधन बहुत खास हो जाता है.

पैदा होने के तुरंत बाद उसे मां का दूध, जिसे खीस भी कहते हैं, पिलाया जाना बहुत जरूरी होता है. जन्म के पहले 4 घंटे के दौरान पिलाया गया खीस नवजात बछिया को बीमारियों से लड़ने की खास ताकत देता है, इसलिए इसे अमृत के समान कहा गया है.

खीस में ऐसा क्या है?

खीस में एक विशेष प्रकार का प्रोटीन होता है. इसे इम्युनोग्लोबुलिंस हैं. इम्युनोग्लोबुलिंस वे सिपाही हैं, जो बछिया के ऊपर किसी भी प्रकार के बैक्टीरिया या वायरस के हमले के समय लड़ते हैं और बछिया की उन तमाम बीमारियों से रक्षा करते हैं.

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