जूट की उन्नत खेती से बढाएं आमदनी

Farm and Food|May Second 2020

जूट की उन्नत खेती से बढाएं आमदनी
हमारे देश में खाद्यान्न भंडारण के लिए जूट के बोरों की बेहद कमी के चलते हर साल हजारों टन अनाज बुरी तरह से बरबाद हो जाता है, जबकि आज भी भारत दुनिया के सब से बड़े जूट उत्पादक देश के रूप में मशहूर है. लेकिन हाल के कुछ सालों में देश में जूट की खेती में भारी कमी देखने को मिल रही है, जबकि जूट और उस से बने उत्पादों की मांग में लगातार बढ़ोतरी हुई है.
बृहस्पति कुमार पांडेय

जूट के रेशे से न केवल बोरे बनाए जाते हैं बल्कि इस से दरी, तंबू, तिरपाल, टाट, रस्सियां और निम्न कोटि के कपड़े तैयार किए जाते हैं. साथ ही, कागज, फैशनेबल चीजें, बैग, कंबल, पैकिंग से जुड़े उत्पाद जैसी सैकड़ों चीजों को बनाया जाता है. भारत से आज भी कई देशों को जूट और उस से बनी तमाम चीजों का निर्यात किया जाता है. ऐसे में किसान अगर जूट की खेती उन्नत और बेहतर तरीके से करें, तो अपनी आमदनी में अच्छाखासा इजाफा कर सकता है. क्योंकि जूट को एक नकदी फसलों में गिना जाता है.

उन्नत किस्में

जूट की फसल से अधिक उत्पादन लेने के लिए उस की उन्नत प्रजातियों का चयन किया जाना जरूरी हो जाता है. जूट की 2 किस्में प्रचलित हैं, जिस में अलगअलग प्रजातियां बोए जाने के लिए उपयोग में लाई जाती हैं. जूट की पहली किस्म को कैपसुलेरिस के नाम से जाना जाता है. इसे सफेद जूट या ककिया बंबई जूट के नाम से भी जाना जाता है. इस की पत्तियां चखने पर स्वाद में कड़वी होती हैं. इस किस्म की प्रजातियों को अगेती फसल के रूप में बोया जाता है. इस की जेआरसी-321 प्रजाति अधिक उत्पादन देने वाली मानी जाती है. इस प्रजाति की फसल जल्दी पक कर तैयार होती है. वहीं दूसरी प्रजाति जेआरसी-212 को देर से यानी मार्च से मई के महीने में बो कर कर के जुलाईअगस्त माह तक काटा जाता है.

जूट की जेआरसी-698 प्रजाति को उन्नत प्रजातियों में गिना जाता है. इसे मार्च महीने से ले कर मई महीने के दूसरे हफ्ते तक बोया जाता है. इस के अलावा कैपसुलेरिस की अंकित (एनडीसी) व एनडीसी 9102 किस्में भी उत्पादन के नजरिए से अच्छी मानी जाती हैं.

जूट की दूसरी किस्म ओलीटोरियस को पछेती फसल के रूप बोआई के लिए सब से उपयुक्त माना जाता है. इस की बोआई अप्रैल माह के अंत से ले कर जून माह के अंत तक की जाती है. इस की उन्नत किस्में जेआरओ-632, जेआरओ-878, जेआरओ 7835, जेआरओ- 524, (नवीन), जेआरओ-66 हैं. इन किस्मों से अच्छी मात्रा में रेशा प्राप्त होता है.

भूमि का चुनाव और खेत की तैयारी

जूट की खेती भारत में पहाड़ी क्षेत्रों को छोड़ कर सभी जगह आसानी से की जा सकती है. इस की खेती सब से अधिक पश्चिम बंगाल में की जाती है. इस के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, असम में भी इस की खेती अच्छे लैवल पर की जाती है.

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