हरे चारे की खेती

Farm and Food|January First 2020

हरे चारे की खेती
पशुओं के भोजन में हरे चारे की एक खास भूमिका होती है. यह दुधारू पशुओं के लिए फायदेमंद भी होता है. हरे चारे के रूप में किसान अनेक फसलों को इस्तेमाल करते हैं. लेकिन ऐसी होती हैं, जो फसलें कुछ लंबे समय तक नहीं चल पाती हैं. यहां कुछ खास फसलों के बारे में जानकारी दी गई है, जो सेहतमंद होने के साथसाथ लंबे समय तक हरा चारा मुहैया कराती हैं.
वेणीशंकर पटेल 'ब्रज'

भारत के जो किसान खेती के साथ पशुपालन भी करते हैं, उन के लिए दुधारू पशुओं और पालतू पशुओं के लिए हरे चारे की समस्या से दोचार होना पड़ता है. बारिश में तो हरा चारा खेतों की मेंड़ या खाली पड़े खेतों में आसानी से मिल जाता है, परंतु सर्दी या गरमी में पशुओं के लिए हरे चारे का इंतजाम करने में परेशानी होती है. ऐसे में किसानों को चाहिए कि खेत के कुछ हिस्से में हरे चारे की बोवनी करें, जिस से अपने पालतू पशुओं को हरा चारा सालभर मिलता रहे.

पालतू पशुओं के लिए हरे चारे की बहुत कमी रहती है, जिस का दुधारू पशुओं की सेहत व दूध उत्पादन पर बुरा असर पड़ता है. इस समस्या के समाधान के लिए जायद में बहु कटाई वाली ज्वार, लोबिया, मक्का और बाजरा वगैरह फसलों को चारे के लिए बोया जाता है.

हालांकि मक्का, ज्वार जैसी फसलों से केवल 4 5 माह ही हरा चारा मिल पाता है, इसलिए किसान कम पानी में 10 से 12 महीने हरा चारा देने वाली फसलों को चुन सकते हैं.

जानकार किसान बरसीम , नेपियर घास, वगैरह लगा कर हरे रिजका चारे की व्यवस्था सालभर बनाए रख सकते हैं.

बरसीम

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