बदलते बिहार की कहानी

Farm and Food|January Second 2020

बदलते बिहार की कहानी
दशकों से बिहार की छवि देश में गरीब, भूखे और नंगों के राज्य के रूप में रही है, लेकिन अब बिहार ने न केवल लोगों की नजर में अपनी छवि सुधारी है, बल्कि यहां के लोग देशदुनिया के साथ कई बड़े पदों पर पहुंच कर अपने राज्य का झंडा बुलंद कर रहे हैं.
बृहस्पति कुमार पांडेय

बिहार में यह बदलाव अब गंवई लैवल पर भी नजर आने लगा है. बिहार के गांवों में न तो पहले की तरह गरीबी रही और न ही बुनियादी सुविधाओं की कमी झेलते हुए लोग. हाल के कुछ सालों में बिहार के गांवों में बुनियादी सुविधाओं में तेजी से इजाफा हुआ है.

यहां के गांवों में अब आनेजाने के लिए पक्की सड़कें, बिजली के वैकल्पिक संसाधन, साफ पानी का चाकचौबंद बंदोबस्त, शिक्षा का बढ़ता लैवल, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच आसान हुई है. इस के अलावा बिहार केवल बुनियादी सुविधाओं में ही आगे नहीं बढ़ा है, बल्कि यहां खेतीबारी में भी उन्नत तकनीक के इस्तेमाल से उत्पादन में बढ़ोतरी होने से किसानों की आमदनी में इजाफा हुआ है.

बिहार में आए बदलाव में केवल सरकार का योगदान ही नहीं है, बल्कि देश की कई सरकारी और कारपोरेट संस्थानों ने भी बिहार को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है. इन निजी संस्थानों ने अपने सामाजिक दायित्व के तहत गांवों में विकास की जो मुहिम चलाई है, वह दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है.

एक पहल आगा खां ग्राम समर्थन कार्यक्रम की

भारत ने जो बिहार के दरभंगा, समस्तीपुर और वैशाली में मुजफ्फरपुर, सारन, होलेस्टिक रूरल डवलपमैंट प्रोग्राम के जरीए खेतीबारी, कौशल विकास व आजीविका, शिक्षा, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन, ऊर्जा प्रबंधन सहित कई मुद्दों पर काम कर रही है. इस से जुड़े गांव पूरी तरह से विकास की धारा में शामिल हो कर लोगों की जिंदगी में बदलाव लाने का काम कर रहे हैं.

खेती में हो रहा नया प्रयोग

आगा खां ग्राम समर्थन कार्यक्रम द्वारा एचडीएफसी बैंक के सहयोग से बिहार के वैशाली जिले के 3 ब्लौकों राजा पाकर, व हाजीपुर के 20 गांवों में 2, 000 परिवारों के साथ दरभंगा, मुजफ्फरपुर, सारन, समस्तीपुर जिलों में सघन रूप से गांव वालों की जीवनशैली में सुधार लाने की कोशिश की जा रही है. इन परिवारों में ऐसे लोगों को शामिल किया गया है, जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के साथ दैनिक मजदूरी करने वाले लोग हैं या खेती पर निर्भर रहने वाले परिवार हैं.

खेती के ऊपर निर्भर रहने वाले लघु और सीमांत किसान परिवारों के लिए आगा खां ग्राम समर्थन कार्यक्रम द्वारा घाटे में रहने वाली पारंपरिक कृषि तकनीक से निकल उन्नत कृषि तकनीक के जरीए आमदनी में इजाफा किए जाने का काम किया जा रहा है. ऐसे किसानों के केवल जरूरी संसाधन मुफ्त लिए संस्था द्वारा न उन्हें समयसमय पर मुहैया कराए जाते हैं, बल्कि ट्रेनिंग वगैरह भी मुहैया कराई जाती है.

जैविक खेती को बढ़ावा

इस संस्था से जुड़े किसान जैविक विधि से खेती कर के अच्छी आमदनी हासिल कर रहे हैं. वैशाली जिले के ब्लौक विदुपुर के गांव चकबिहारी के भ्रमण के दौरान यहां के गांव वालों ने बैठक कर किसानों द्वारा अपनाए जा रहे कृषि मौडल की जानकारी दी.

युवा किसान सुजीत कुमार ने बताया कि पहले यहां के किसान पारंपरिक फसलों की खेती पर निर्भर थे, जिस से परिवारों की आमदनी न के बराबर हुआ करती थी. ऐसे में किसान परिवारों के पुरुष बाहर के शहरों में काम करने जाते थे, लेकिन एक साल पहले आगा खां ग्राम समर्थन कार्यक्रम द्वारा किसानों के साथ बैठक कर उन की खेती में तकनीकी सहायता देने की बात रखी, तब किसानों ने संस्था की देखरेख में पारंपरिक तरीकों से खेती छोड़ उन्नत खेती की दिशा में कदम बढ़ाया.

संस्था द्वारा इस गांव के किसानों को न केवल मुफ्त सब्जियों के बीज मुहैया कराए गए, बल्कि मचान खेती के लिए बांस, तार, डोरी, रस्सी, वर्मी कंपोस्ट के लिए केंचुओं सहित सभी जरूरी संसाधन मुहैया कराए.

सुजीत कुमार ने बताया कि वे संस्था की देखरेख में सब्जियों की खेती कर रहे हैं. वर्तमान में गोभी और करेले की खेती कर रखी है, जिस से उन्हें अच्छीखासी आमदनी हो जाती है. इस से वे परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के साथ ही बचत भी कर रहे हैं.

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January Second 2020