केले में कीट व रोगों की रोकथाम

Farm and Food|January First 2020

केले में कीट व रोगों की रोकथाम
आप ने पिछले अंक में पढ़ा था कि वैज्ञानिक तरीके की खेती कैसे से केले करें और केले की अच्छी उपज देने वाली खास किस्मों के बारे में विस्तार से बताया गया था. इस अंक में आप को केले की फसल में लगने वाले कीट व रोगों के बारे में जानकारी व उन की रोकथाम कैसे की जाए बताया जा रहा है.
डा.मनोज कुमार शर्मा

प्रकंद छेदक कीट

इस प्रकंद छेदक कीट का वैज्ञानिक नाम कौस्मोपोलाइट्स सौडिडस है. इस कीट का प्रकोप पौध लगाने के 1 या 2 महीने बाद शुरू हो जाता है.

शुरू में इस कीट के ग्रब तने में छेद कर तने को खाते हैं, जो बाद में राइजोम की तरफ बढ़वार चले जाते हैं. इस के प्रकोप से पौधों की जाती है. पौधे बीमार से लगने लगते हैं मंद पड़ और उन की पत्तियों पर पीली धारियां उभर आती हैं. इस कीट के अधिक प्रकोप से पत्ती और धार का आकार छोटा हो जाता है.

रोकथाम

- स्वस्थ सकर का ही चुनाव करें.

- एक ही खेत में लगातार केले की फसल न लें.

- सकर को रोपने से पहले 0. 1 फीसदी क्विनालफास के घोल में डुबोएं.

- रोपण के समय क्लोरोपायरीफास चूर्ण प्रति गड्ढे की दर से मिट्टी में मिलाएं.

- प्रभावित और सूखी पत्तियों को काट कर जला दें.

-कार्बोफ्यूरान 20 ग्राम प्रति पौधा के उपयोग से इस कीट का प्रभावी नियंत्रण होता है.

तना बेधक कीट

इस कीट का वैज्ञानिक नाम ओडोपोरस लांगिकोल्लिस है. इस कीट के प्रकोप से पत्तियां धीरेधीरे पीली पड़नी शुरू हो जाती हैं, बाद में तने पर पिन के सिर के आकार के छेद दिखाई लगते हैं. उस के बाद तने से गोंद जैसा पड़ने पदार्थ निकलना शुरू हो जाता है. लिसलिसा ग्रब शुरू में पर्णवृंत को खाते हैं, बाद में तने में लंबी सुरंग बना देते हैं, जो बाद में सड़ कर बदबू पैदा करती है.

इस कीट के अधिक प्रकोप से पौधों पर नहीं आते हैं फूल अथवा फूलों की तादाद बहुत कम हो जाती है. धार का आकार बहुत छोटा रह है जाता और फलों का विकास अच्छी प्रकार से नहीं हो पाता है.

रोकथाम

- प्रभावित पौधों को उखाड़ कर नष्ट कर दें.

- प्रकंद छेदक कीट के नियंत्रण में जो सुझाव दिए गए हैं, उन्हें अपनाएं.

माहू कीट

इस कीट का वैज्ञानिक नाम पेंटालोनिया नाईग्रोनोसा है. यह कीट पौधों से रस चूस कर पौधों की बढ़वार को प्रभावित करता है और शीर्ष गुच्छ रोग पैदा करने वाले विषाणु को फैलाता है

रोकथाम

( 1 ) प्रभावित पौधों को उखाड़ कर नष्ट कर दें.

( 2 ) प्रभावित क्षेत्रों में पेड़ी फसल न लें.

( 3 ) डाईमिथोएट 2 मिलीलिटर प्रति लिटर की दर से पानी में घोल कर छिड़काव करें.

सिगाटोका पत्ती धब्बा रोग

यह रोग स्यूडोसर्कोस्पोरा म्यूसी नामक फफूंद से होता है. इस रोग की शुरुआत में पत्ती की बाहरी सतह पर पीले धब्बे बनना शुरू हो कर बाद में लंबी काली धारियों के रूप में बदल जाते हैं और कालांतर में बड़ेबड़े धब्बों का रूप ले लेते हैं.

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