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Shikhar Varta - December 2018Add to Favorites

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Magazine Description

In this issue

तीन राज्यों में काँग्रेस ने फहराया परचम पाँच राज्यों के चुनावी नतीजों ने विपक्षी एकता के प्रयासों में काँग्रेस को केंद्रीय भूमिका में ला दिया है। इससे काँग्रेस तो मज़बूत हुई ही है, साथ ही राहुल गाँधी के नेतृत्व की सराहना भी होने लगी है। संभावित महागठबंधन का नेतृत्व अब यदि राहुल करें तो आश्चर्य नहीं होगा। यह जनादेश भाजपा के लिए भी सबक़ का काम करेगा। मोदी के विजय रथ को थामेगा यह जनादेश? हाल ही में सपंन्न पाँच राज्यों के चुनाव परिणाम समाज के उस ‘अंडर करैंट’ को भी बयां करते हैं जो कि साढ़े चार साल की मोदी सरकार के कामकाज के नफा-नुक़सान को व्यक्त करते हैं। इसलिए कहा जाना चाहिए कि जहाँ ये परिणाम काँग्रेस के लिए संजीवनी बूटी सिद्ध हुए हैं, वहीं भाजपा के लिए आत्ममंथन का सबब। राम मंदिर के लिए कानून! राम मंदिर पर कानून को लेकर सरकार और बीजेपी के भीतर एक तरह का असमंजस भी देखने को मिल रहा है। अयोध्या में राम मंदिर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठन चाहे जितना ही शोर मचाएं मगर हक़ीक़त यह है कि मोदी सरकार का संसद के शीतकालीन सत्र में राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने का कोई इरादा नहीं है। राजनीति : पैसा, पॉवर और रसूख का गठजोड़ राजनीति अब सेवा के लिए या किसी भी राजनैतिक दल के लिए और न किसी व्यक्ति के लिए रह गई है। चुनाव जीतने का मतलब पैसे कमाने की मशीन पर हक़ है। यह चाहे ईमानदारी से हो या बेईमानी से। राजनीतिज्ञों को जो वेतन भत्ते मिलते हैं उन्हें तय करने और समय-समय पर बढ़ाने का अधिकार इन्हीं को है और इसमें ये पीछे नहीं रहते। महिला शक्ति का प्रतीक बनीं : मेरी कॉम दिल्ली में संपन्न इस चैंपियनशिप में सबकी निगाहें मैरी कॉम पर टिकी थीं, उन्होंने सभी की उम्मीद पर खरा उतरकर गोल्ड जीता। मैरी कॉम ने फाइनल में यूक्रेन की हना ओखोटा को 5-0 से मात देते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने बहुत विश्‍वास के साथ जीत हासिल कर दिखा दिया कि उन्हें क्यों ‘‘मैगनीफिशेंट मेरी’’ कहा जाता है।

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