Shikhar Varta - December 2017Add to Favorites

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प्रयोगों ने किया शिक्षा का बंटाधार वर्तमान शिक्षा भारतीय परिस्थितियों के प्रतिकूल है। यहाँ स्कूलों और कॉलेजों की टकसाल में ऐसे सिक्के ढाले जा रहे हैं, जिनका जीवन रूपी बाज़ार में कोई मूल्य नहीं है। शिक्षा प्रणाली में सुधार तो चाहिए किन्तु ऐसा सुधार जिससे भारत का भविष्य उज्ज्वल हो सके तथा छात्रों में निर्मल राष्ट्रीयता का उदय भी हो सके। संकोची ‘युवराज’ राहुल गाँधी की ताजपोशी! आखिरकार काँग्रेस के शीर्षस्थ नीति निर्धारक निकाय ने उपाध्यक्ष राहुल गाँधी को पदोन्नति करने का मार्ग प्रशस्त कर ही दिया। 47 वर्षीय राहुल गाँधी की ताजपोशी बाक़ायदा चुनावी प्रक्रिया से ही संपन्न होने की पूरी संभावना है। उनके विरुद्ध कोई दूसरा उम्मीदवार मैदान में फिलहाल नहीं है। गुजरात में कांटे के मुकाÞबले में फंसी भाजपा भाजपा की शीर्षस्थ जुगल जोड़ी नरेन्द्र मोदी और अमित शाह गुजरात में सबसे मुश्किल चुनावी लड़ाईयों में एक से मुकाबिल हैं, अपने गृह राज्य में दोनों को शुरुआत में लड़ाई आसान सी दिख रही थी, जो अािखर में मोदी को केवल गुजराती बताने तक आ पहँुची है। आलोचना करने के लिए आलोचना विमौद्रीकरण उर्फ नोटबंदी जैसा कि आम भाषा में प्रचलित किया जा रहा है, साल भर बीत जाने के बाद भी चर्चा में बना हुआ है। विपक्ष उसे हर चुनाव में या सरकार की आलोचना करने में प्रयुक्त करके उसे एक बड़ा मुद्दा मानकर जीवित रखे हुए है और शायद 2019 तक रहेगा लेकिन सिर्फ आलोचना के लिए आलोचना करना ठीक नहीं। महिलाओं की प्रेरणापुंज दुनिया में भारतीय महिलाओं ने जो कमाल किया है वो वाकई काबिले तारीफ है। एक समय था जब राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय महिलाएं गिनी-चुनी ही थीं। जहाँ भारत की महिला हॉकी टीम ने चीन को हराकर एशिया कप जीता वहीं अपनी सुपर बॉक्सर मैरी कॉम ने एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप का स्वर्ण एवं मीरा बाई चानू ने वेटलिफ्टिंग के वर्ल्ड चेम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीत कर देश को गौरवान्वित किया। पद्मावती : सियासत का जौहर ‘पद्मावती’ को लेकर कई इतिहासकारों का मानना है कि इतिहास के पन्‍नों में अलाउद्दीन के ज़माने में पद्मावती नाम के किसी किरदार का जिक्र नहीं मिलता। उनके मुताबिक़ पद्मावती केवल एक साहित्यिक किरदार थी। वे मानते हैं कि चारण परंपरा, लोक कथाओं, वाचक परंपरा और जनश्रुति के चलते यह किरदार सदियों से जीवित है।

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