Shikhar Varta - July 2017Add to Favorites

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गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बनी अबूझ पहेली! शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो पाने का कारण यह है कि उसे परिभाषित करने वाले लोगों की नजर आवश्यक सामग्री, संसाधन एवं विद्यालय-भवन तक ही जा पाती है। अधिक से अधिक परीक्षा में पास बच्चों के प्रतिशत या बच्चों के अंकों के प्रतिशत तक जाती है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की धारणा इन्हीं में उलझकर रह जाती है। भारत के प्रथम नागरिक रामनाथ कोविंद! रामनाथ कोविंद के नाम पर विपक्ष भी हतप्रभ है। दलित और पिछड़ी जातियों के नाम पर राजनीति करने वाले दल बेशक सीधे तौर पर उनके नाम का विरोध नहीं कर पायेंगे। मतों के गणित के अनुसार रामनाथ कोविंद का अगला राष्ट्रपति बनना तय है। तय जो नहीं है वह है कितने वोटों के अंतर से वह विपक्षी उम्मीदवार को पराजित करते हैं। क्या पाने के लिए हम सब कुछ खो रहे हैं? शिक्षा क्षेत्र में हमारे विकास की दृष्टि केवल धन के व्यय पर है। विदेशों से प्राप्त उधार शिक्षण प्रणाली हम पर थोपी जा रही है। शिक्षा सरकारी मशीनरी के लिए एक बोझ बनती जा रही है। इसलिए शिक्षा में गुणवत्ता के लिए हमें पुन: विचार करना होगा। बार-बार सोचें कि क्या पाने के लिए शिक्षा दी जा रही है और हम उसके स्थान पर क्या खोते जा रहे हैं। मोदी ने रचा इतिहास जीएसटी पर इतनी चर्चा हो चुकी है कि लगभग हर व्यक्ति कुछ न कुछ ज़रूर उस बारे में जानता है। मोदी सरकार 3 साल से इसे लागू करने के प्रयास करती रही है, जो अब जाकर 1 जुलाई 2017 से लागू हो पाया। सरकार एवं अर्थशास्त्री इसके तमाम फायदे बता रहे हैं, तो इसकी खामियाँ और दिक्Þक़तें बताने वालों की भी कमी नहीं है। भारतीय क्रिकेट में कोच की जंग अनिल कुंबले के इस्तीफे के बाद टीम इंडिया के लिए नए कोच की कवायद ने तेजी पकड़ ली है। उनके इस्तीफे के बाद साफ हो गया कि टीम के लिए नया कोच नियुक्त करना ही होगा। टीम इंडिया में कप्तान बड़ा या कोच का सवाल तो बड़ा बन ही गया है, इस बात पर भी बहस तेज हो गई है कि कांटों का ताज पहनने के लिए टीम इंडिया का अगला कोच किसे बनाया जाएगा? परदे के मशहूर ‘खलनायक’ भारतीय फिल्मों का इतिहास बिना खलनायकों की उपस्थिति के अधूरा है। खलनायकों ने भारतीय फिल्मों को एक नया आयाम दिया है। कई फिल्में तो अभिनेता से अधिक खलनायक के कारण चलीं या चर्चा में रहीं। एक से एक धुरंधर खलनायक को हमने बचपन से आज तक फिल्मी पर्दे पर देखा है।

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