Shikhar Varta - February 2017Add to Favorites

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Magazine Description

In this issue

बेदम काँग्रेस को ‘युवा तुर्क’ की तलाश काँग्रेस पार्टी में नेताओं की आपसी गुटबाज़ी से कार्यकर्ता असमंजस में हैं कि क्या पार्टी भाजपा सरकार को एक और वॉक ओवर देने की तैयारी में है। वि पक्षी दल के नाते पार्टी पांच साल किसी मुद्दे को कारगर तरीके से उठा पाने और शिवराज सिंह चौहान सरकार को कठघरे में ला पाने में नाकाम ही रही है। जन-गण का ‘मन’ तय करेगा देश की राजनीति की नई तस्वीर 11 मार्च को देखें 5 विधानसभाओं में कौन सा दल कहाँ अपनी जगह बना पाता है। क्या काँग्रेस कहीं अपना स्पष्ट बहुमत प्राप्त कर पायेगी या ये दो राज्य भी उसके हाथ से जाते रहेंगे। भाजपा बेशक ऐड़ी-चोटी का ज़ोर लगा रही है और ‘आप’ भी पंजाब और गोवा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की जुगत में है। जन आंदोलन नहीं बन सका सूचना का अधिकार क़ानून यह क़ानून 11 साल पूरी कर चुका है किंतु समस्या जस की तस है। सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ने के बावजूद सरकार की न्यून दिलचस्पी का ही नतीजा है कि यह क़ानून भी भ्रष्टाचार की नक़ेल न कस सका। आज भी यह भ्रष्ट नेता-अफसर के इर्द-गिर्द ही घूम रहा है। नोटबंदी के हंगामे में राहत देगा बजट? नोटबंदी के बाद देश में मची खलबली के बीच इसे लेकर विभिन्न लोगों की अलग-अलग राय नज़र आयी। जहाँ एक वर्ग इसे अनावश्यक और तकलीफ देने वाला क़दम बता रहा था, वहीं दूसरा इसे देशहित में एक युगांतकारी और अभिनव क़दम बता रहा था जो कि आने वाले समय में देशहित में साबित होगा। खेल ही नहीं, सौष्ठव में भी गजब विराट! विराट कोहली की मैदान पर क्षमताओं को बयां करने के लिए कमेंटेटरों के पास अब अक्‍सर शब्‍दों की कमी होने लगी है। चाहे बड़े स्‍कोर बनाने की बात हो या सफलतापूर्वक टीम इंडिया की कप्‍तानी करने की, कोहली ऐसा प्रदर्शन कर रहे हैं जो लोगों को हैरान होने पर मजबूर कर रहा है। ओम पुरी : शाँत हुआ कला का आक्रोश भारतीय सिनेमा के अमिट हस्ताक्षर ओम पुरी उन चंद कलाकारों में से थे जिन्हें भारत और ब्रिटेन दोनों सरकारों के उच्च पुरस्कार मिले। 1990 में उन्हें भारत सरकार की ओर से ‘पदम श्री’ मिला तो 2004 में उन्हें ब्रितानी फिल्म उद्योग में योगदान के लिए मानक ओबीई (आॅर्डर आॅफ द ब्रिटिश एम्पायर) मिला था।

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