Panchjanya - 11 July 2021Add to Favorites

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Magazine Description

In this issue

सांच को आंच - देश में 2014 से हुए राजनीतिक बदलाव के बाद निरंतर यह बात देखने में आ रही है कि किसी घटना पर कोई खबर आती है, उससे एक आख्यान (नैरेटिव) बनता है और कुछ समय बाद पता चलता है कि वह खबर झूठी थी या फिर उस खबर में आधा सत्य छिपा लिया गया जिससे शेष आधे सत्य का कोई और ही अर्थ निकला। जब इस पर सवाल उठे तो झूठ फैलाने वालों के तंत्र से एक फैक्ट चेकर निकला जिसने खबरों की पड़ताल तथ्यों के आधार पर करके सत्य की स्थापना का दम भरा। परंतु जब सच की रखवाली का दम भरने वाले ‘फैक्ट चेकर’ झूठ फैलाते मिलें, नामी मीडिया संस्थानों की कई खबर लगातार झूठी निकल रही हों तो पत्रकारिता को धक्का लगना ही है। चिंता इस बात पर भी कि इसके बावजूद भारत में यह हो रहा है और इस सब से बेपरवाह, सबका ‘धंधा’ चल रहा है। इस धंधे का पदार्फाश करने का बीड़ा उठाया पीआईबी ने और एक मंच पीआईबी फैक्ट चेकर तैयार किया। इसमें फेक खबरें और इनके सच को ट्विटर पर जारी किया जाने लगा। इससे बड़े-बड़े मीडिया संस्थान जनता के सामने बेनकाब होने लगे। हालांकि इस दिशा में अभी बहुत काम किए जाने की जरूरत है क्योंकि ये फेक न्यूज कोई मानवीय त्रुटि नहीं हैं बल्कि देश के विरुद्ध एक षड्यंत्र है। पाञ्चजन्य की विशेष तथ्यान्वेषी रिपोर्ट

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